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परिक्रमा का महत्व

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भगवान की परिक्रमा क्यों और कितनी जब हम मंदिर जाते है तो हम भगवान की परिक्रमा जरुर लगाते है. पर क्या कभी हमने ये सोचा है कि देव मूर्ति की परिक्रमा क्यो की जाती है? शास्त्रों में लिखा है जिस स्थान पर मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा हुई हो, उसके मध्य बिंदु से लेकर कुछ दूरी तक दिव्य प्रभा अथवा प्रभाव रहता है,यह निकट होने पर अधिक गहरा और दूर दूर होने पर घटता जाता है, इसलिए प्रतिमा के निकट परिक्रमा करने से दैवीय शक्ति के ज्योतिर्मडल से निकलने वाले तेज की सहज ही प्राप्ती हो जाती है. कैसे करे परिक्रमा देवमूर्ति की परिक्रमा सदैव दाएं हाथ की ओर से करनी चाहिए क्योकि दैवीय शक्ति की आभामंडल की गति दक्षिणावर्ती होती है।बाएं हाथ की ओर से परिक्रमा करने पर दैवीय शक्ति के ज्योतिर्मडल की गति और हमारे अंदर विद्यमान दिव्य परमाणुओं में टकराव पैदा होता है, जिससे हमारा तेज नष्ट हो जाता है.जाने-अनजाने की गई उल्टी परिक्रमा का दुष्परिणाम भुगतना पडता है. किस देव की कितनी परिक्रमा करनी चाहिये ? वैसे तो सामान्यत: सभी देवी-देवताओं की एक ही परिक्रमा की जाती है परंतु शास्त्रों के अनुसार अलग-अलग देवी-देवताओं के लिए ...
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क्या है महामृत्युंजय जाप ?? श्रावण के महीने में महामृत्युंजय करने से समस्त नवग्रह की शांति हो जाती है भविष्य में आने वाली सभी समस्या का समाधान हो जाता है जिनके घर महामृत्युंजय की पूजा होती है उस घर में भगवान शिव का वास होता है इस कारण उस घर में भूत-प्रेत कभी नहीं आते दुख दरिद्र कभी नहीं आते भगवान शिव की कृपा से घर में शांति बनी रहती है !!  **** घर का कोई सदस्य किसी गंभीर बीमारी से ग्रस्त है और समझती इलाज कराने के बाद में भी स्वास्थ्य लाभ नहीं हो रहा है तो भगवान मृत्युंजय का जाप घर में कराना चाहिए ***जिन घर में आर्थिक तंगी चल रही है प्रयास करने के बाद में भी नौकरी नहीं लग पा रही जॉब के लिए परेशान हो रहै है वह व्यक्ति कहीं मृत्युंजय का जाप करा ले तो उसके घर में धन धान्य की वृद्धि होगी *रुद्राभिषेक- विधान-एक सम्पूर्ण जानकारी-* रूद्र अर्थात भूत भावन शिव का अभिषेक शिव और रुद्र परस्पर एक दूसरे के पर्यायवाची हैं। शिव को ही रुद्र कहा जाता है क्योंकि- *रुतम्-दु:खम्, द्रावयति-नाशयतीतिरुद्र:* यानि की भोले सभी दु:खों को नष्ट कर देते हैं। हमारे धर्मग्रंथों के अनुसार हमारे द्वारा ...
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#शिवलिंग_पर_कौन_सा_अनाज_चढ़ने_से_क्या_फल_मिलता_है =================== हिन्दू धर्म में भगवान शंकर सांसारिक सुखों से जुड़े सारे मनोरथ पूरे करने वाले देवता हैं। उनकी प्रसन्नता के लिए धर्मग्रंथों में कई व्रत-उपवास बताए गए हैं। कई भक्त अलग-अलग वजहों से व्रत के धार्मिक विधानों का पालन नहीं कर पाते।  इसलिए ऐसे भक्तों के लिए जो व्रत नहीं रख पाते हैं। शिवपुराण में बताए अलग-अलग अनाज का चढ़ावा सुख-सौभाग्य व धन सहित कई मनचाहे फल देने वाला माना गया है। इन उपायों से पहले भगवान शिव की सामान्य पूजा यानी चंदन, बिल्वपत्र, फूल, छोटा सफेद वस्त्र चढ़ाकर करें और इनके साथ यहां बताए अनाज व फूल शिवलिंग पर चढ़ाएं। इन चीजों से कामना विशेष पूरी करते हैं। जानिए कौन सा अनाज व फूल चढ़ाने का उपाय कौन सी चाहत पूरी करता है। इनको चढ़ाते वक्त ये मंत्र स्मरण करना शुभ होगा- मृत्युंजयाय रुद्राय नीलाकंताया शम्भवे। अमृतेशाय सर्वाय महादेवाय ते नमः।। - देव पूजा में अक्षत यानी चावल का चढ़ावा बहुत ही शुभ माना जाता है। शिव पूजा में भी महादेव या शिवलिंग के ऊपर चावल, जो टूटे न हो चढ़ाने से लक्ष्मी की कृपा यानी धन ल...
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*"अमावस्या और पूर्णिमा का रहस्य"।* ****************************** हिन्दू धर्म में पूर्णिमा, अमावस्या और ग्रहण के रहस्य को उजागर किया गया है। इसके अलावा वर्ष में ऐसे कई महत्वपूर्ण दिन और रात हैं,जिनका धरती और मानव मन पर गहरा प्रभाव पड़ता है। उनमें से ही माह में पड़ने वाले 2 दिन सबसे महत्वपूर्ण हैं ~ पूर्णिमा और अमावस्या। पूर्णिमा और अमावस्या के प्रति बहुत से लोगों में डर है। खासकर अमावस्या के प्रति ज्यादा डर है। वर्ष में 12 पूर्णिमा और 12 अमावस्या होती हैं। सभी का अलग-अलग महत्व है। || माह के 30 दिन को चन्द्र कला के आधार पर 15-15 दिन के 2 पक्षों में बांटा गया है ~ *'शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष'*। शुक्ल पक्ष के अंतिम दिन को पूर्णिमा कहते हैं और कृष्ण पक्ष के अंतिम दिन को अमावस्या। || यदि शुरुआत से गिनें तो 30 तिथियों के नाम निम्न हैं~पूर्णिमा(पुरणमासी), प्रतिपदा (पड़वा), द्वितीया (दूज), तृतीया (तीज), चतुर्थी (चौथ), पंचमी (पंचमी), षष्ठी (छठ), सप्तमी (सातम), अष्टमी (आठम), नवमी (नौमी), दशमी (दसम), एकादशी (ग्यारस), द्वादशी (बारस), त्रयोदशी (तेरस), चतुर्दशी (चौदस) और ...
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        शुरू होगया सावन, जानें शिव पूजन विधि 28 जुलाई 2018 भगवान शिव को करें प्रसन्न और पाएँ वरदान! 28 जुलाई 2018 से श्रावण मास की शुरुआत हो रही है। जानें भगवान शिव को प्रिय इस माह की महिमा और महत्व! श्रावण मास हिन्दू धर्म में श्रावण मास का विशेष महत्व है, विशेष रूप से भगवान शिव की आराधना के लिए। क्योंकि सावन का महीना भगवान शिव को समर्पित है। हिंदू पंचांग के अनुसार चैत्र माह से प्रारंभ होने वाले वर्ष का पांचवां महीना श्रावण मास है। इंग्लिश कैलेंडर के अनुसार सावन का महीना जुलाई या अगस्त माह में आता है। श्रावण मास का आगमन वर्षा ऋतु के समय में होता है। यह वह समय होता है जब धरती पर चारों ओर हरियाली ही हरियाली होती है। सावन में स्नान और भगवान शिव का रुद्राभिषेक करने का बड़ा महत्व है। सावन के सोमवार की तारीख सावन के सोमवार दिनांक सावन माह प्रारंभ 28 जुलाई 2018 सावन का पहला सोमवार  30 जुलाई 2018 सावन का दूसरा सोमवार 6 अगस्त 2018 सावन का तीसरा सोमवार 13 अगस्त 2018 सावन का चौथा सोमवार 20 अगस्त 2018 सावन माह का अंतिम दिन 26 अगस्त 2018 सावन...
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वैभव लक्ष्मी व्रत विधि* वैभव लक्ष्मी व्रत विधि, ऐसे करें वैभव लक्ष्मी का व्रत सुख- समृद्धि, धन, ऐश्वर्य, वैभव, व् अन्य इच्छाओ की पूर्ति के लिए वैभव लक्ष्मी का व्रत किया जाता है। इस व्रत की शुरुआत आप किसी भी शक्रवार को कर सकते है, और व्रत की शुरुआत में आपको ग्यारह या इक्कीस व् अपनी इच्छानुसार व्रत की मन्नत करनी चाहिए और संकल्प लेना चाहिए। इस व्रत को रखने पर यदि आप बीच में किसी कारण व्रत नहीं रख पाएं हैं तो उसे शुक्रवार व्रत की गिनती में न लेते हुए आपको अगले शुक्रवार को व्रत करना चाहिए। और इस व्रत को रखने पर आपको अपने घर में ही पूजा करनी चाहिए, यदि आपको कहीं बाहर जाना पड़ता है तो व्रत नहीं करना चाहिए। इस व्रत को कोई भी स्त्री, पुरुष, कुँवारी लड़की कोई भी कर सकता है। वैभव लक्ष्मी के व्रत को वरदलक्ष्मी का व्रत भी कहा जाता है। ऐसा भी कहा जाता है की वैभव लक्ष्मी की कथा को सुनने से भी आपको बहुत फल मिलता है। माँ लक्ष्मी के अनेक रूपों में वैभव लक्ष्मी भी आपकी सभी परेशानियों का समाधान करने में आपकी मदद करती है। तो आइये अब जानते हैं की वैभव लक्ष्मी का व्रत रखने के क्या नियम होते है, और इस ...
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                    16 सोमवार व्रत नियम 16 सोमवार का व्रत श्रावण, चैत्र, वैसाख, कार्तिक और माघ महीने के शुक्ल पक्ष के पहले सोमवार से शुरू किया जाता है। मान्यता है इस व्रत को लगातार 16 सोमवार तक श्रद्धापूर्वक रखने से व्यक्ति की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। और उसे जीवन में किसी भी कष्ट का सामना नहीं करना पड़ता। इसीलिए आज हम आपको 16 व्रत विधि, उसके नियम और उससे मिलने वाले फल के बारे में विस्तार से बताने जा रहे है। 16 सोमवार व्रत नियम और विधि :- इस व्रत को करने के लिए आप सुबह नहा धोकर आधा सेर गेहूं का आटा को घी में भून कर गुड़ मिला कर अंगा बना लें। उसके बाद इस प्रसाद को तीन भागो में बात लें। उसके बाद दीप, नैवेद्य, पूंगीफ़ल, बेलपत्र, धतूरा, भांग, जनेउ का जोड़ा, चंदन, अक्षत, पुष्प, आदि से प्रदोष काल में भगवान शिव की पूजा अर्चना करें, और अपनी मनोकामना के बारे में कहें। पूजा करने के बाद कथा करें, आरती करें, उसके बाद एक अंग भगवान् शिव को अर्पण करके उसका भोग लगाएं, और बाकी दो को बात दें, और खुद भी उसे प्रसाद स्वरुप ग्रहण करें।   1...