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संस्कृत हनुमान चालीसा

 *संस्कृत में हनुमान चालीसा*  〰️〰️🔸〰️〰️🔸〰️〰️ श्री गुरु चरण सरोज रज निज मनु मुकुरु सुधारि । बरनऊं रघुवर बिमल जसु जो दायकु फल चारि ।। बुद्धि हीन तनु जानिकै सुमिरौं पवनकुमार । बल बुद्धि विद्या देहु मोहि हरहु क्लेश विकार ।। हृद्दर्पणं नीरजपादयोश्च                                                                                              गुरोः पवित्रं रजसेति कृत्वा ।    फलप्रदायी यदयं च सर्वम्                                     रामस्य पूतञ्च यशो वदामि ।।                                              स्मरामि तुभ्यम् पवनस्य पुत्रम्...

पुरषोत्तम मास

 *क्या है अधिकमास, कब आता है, जानिए इसका पौराणिक आधार*       हिंदू कैलेंडर में हर तीन साल में एक बार एक अतिरिक्त माह का प्राकट्य होता है, जिसे अधिकमास, मल मास या पुरुषोत्तम मास के नाम से जाना जाता है। हिंदू धर्म में इस माह का विशेष महत्व है। संपूर्ण भारत की हिंदू धर्मपरायण जनता इस पूरे मास में पूजा-पाठ, भगवतभक्ति, व्रत-उपवास, जप और योग आदि धार्मिक कार्यों में संलग्न रहती है। ऐसा माना जाता है कि अधिकमास में किए गए धार्मिक कार्यों का किसी भी अन्य माह में किए गए पूजा-पाठ से 10 गुना अधिक फल मिलता है। यही वजह है कि श्रद्धालु जन अपनी पूरी श्रद्धा और शक्ति के साथ इस मास में भगवान को प्रसन्न कर अपना इहलोक तथा परलोक सुधारने में जुट जाते हैं। अब सोचने वाली बात यह है कि यदि यह माह इतना ही प्रभावशाली और पवित्र है, तो यह हर तीन साल में क्यों आता है? आखिर क्यों और किस कारण से इसे इतना पवित्र माना जाता है? इस एक माह को तीन विशिष्ट नामों से क्यों पुकारा जाता है? इसी तरह के तमाम प्रश्न स्वाभाविक रूप से हर जिज्ञासु के मन में आते हैं। तो आज ऐसे ही कई प्रश्नों के उत्तर और अधिकमास क...

पितृ पक्ष 2020 उपाय

 *पितृ मोक्ष अमावस्या*  🚩 पितृ मोक्ष अमावस्या हिन्दी आश्विन माह की अमावस्या के दिन  मनाया जाता है। 🚩  पितृ मोक्ष अमावस्या के दिन हम अपने पितरो को विदाई देते है। 🚩 हमारे दिवंगत परिजनो की तिथि की जानकारी यदि हमे नही है  तो उनका श्राद्ध हम इस पितृ मोक्ष अमावस्या के दिन कर सकते है। 🚩 श्राद्घ करने के साथ ही साथ प्रसन्न मन से ब्राह्मण को सीधा ( कच्चा भोजन बनाने की सामग्री  ÷ आटा + चावल + दाल + कच्ची सब्जी + घी + शक्कर + नमक इत्यादि ) वस्त्र + दक्षिणा के साथ अवश्य दे। 🚩  पितृ मोक्ष अमावस्या के दिन बड़े पेड़ो  ( पीपल + बरगद + आम + ऑवला + शमी + अशोक + बादाम + बेल इत्यादि ) का वृक्षारोपण अवश्य करे। 🚩 पितृ मोक्ष अमावस्या के दिन पीली सरसो का छिड़काव पूरे भवन मे अवश्य करे। 🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩 *एस्ट्रो कृष्णाकविता वर्मा*  👩‍💻🙏💐📱 *8574074069*  📱 *9696399616*
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🕉 *महाशिवरात्रि*🕉 *महाशिवरात्रि इस बार 4 मार्च सोमवार को मनाई जाएगी। इस दिन सर्वार्थसिद्धि योग व श्रवण नक्षत्र का श्रेष्ठ संयोग बन रहा है। इस दिन विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना करने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।*  *4 मार्च को सुबह 6.52 से दोपहर 12.30 बजे तक सर्वार्थ सिद्धि योग है।* *दोपहर 12.10 बजे तक श्रवण नक्षत्र है। शाम 4.29 बजे तक त्रियोदशी है। इसके बाद चतुर्दशी प्रारंभ होगी। इस कारण इस बार शिवरात्रि को सोमवार होने के अलावा सर्वार्थ सिद्धि व श्रवण नक्षत्र का भी विशेष योग बन रहा है। इस कारण इस बार 4 मार्च को शिवरात्रि मनाई जाएगी। यह योग सभी कार्यों में सफलता, धन संपत्ति, सुख व प्रेम प्रदान करने वाला है। इस दिन श्रद्धालुओं को भगवान शिव की विधि-विधान के साथ पूजा कर उपवास रखना चाहिए। चार प्रहर की पूजा का भी विशेष महत्व है ।* *रुद्राभिषेक भगवान शिव को प्रसन्न करने का सबसे सरल एवम प्रभावी उपाय है।  शिवरात्रि के दिन यदि रुद्राभिषेक किया जाये तो इसकी महत्ता और भी बढ़ जाती है। रुद्राभिषेक का अर्थ है भगवान रुद्र का अभिषेक अर्थात शिवलिंग पर रुद्र के मंत्रों के द्वारा ...

महाशिवरात्रि

4 मार्च, सोमवार को महाशिवरात्रि है। सोमवार और शिवरात्रि का शुभ योग होने से इस दिन का महत्व काफी अधिक बढ़ गया है। इस दिन शिव-पार्वती की विशेष पूजा करनी चाहिए। शिवरात्रि पर पति-पत्नी एक साथ शिव-पार्वती की पूजा करेंगे तो उनके वैवाहिक जीवन की परेशानियां दूर हो सकती हैं। शिवरात्रि पर शिवजी को चढ़ाना चाहिए 15 चीजें चंदन, धतूरा, चावल, आंकड़े के फूल, बिल्वपत्र, जनेऊ, प्रसाद के लिए फल, दूध, मिठाई, नारियल, पंचामृत, सूखे मेवे, मिश्री, पान, दक्षिणा पूजा में शिवलिंग पर जरूर चढ़ाएं। शिव मंत्र : ऊँ ह्रीं नमः शिवायै च नमः शिवाय 108 बार करना है। शिव पूजा की 11 स्टेप्स 1. इस दिन पति-पत्नी घर के मंदिर में शिव-पार्वती के सामने पूजा करने का संकल्प करें। यानी इस दिन आपको एक साथ शिव-पार्वती की पूजा करनी है, इस बात का संकल्प करना है। 2. घर में मंदिर में या किसी अन्य मंदिर में शिव-पार्वती की पूजा का प्रबंध करें। पति-पत्नी आसन पर बैठें और सबसे पहले गणेशजी का पूजन करें। पत्नी को पति के बाएं हाथ की ओर बैठना चाहिए। 3. गणेशजी को स्नान कराएं। वस्त्र अर्पित करें। गंध, हार-फूल, चावल, प्रसाद, जनेऊ आदि ...

माघ संकष्ठी व्रत

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राधेकृष्णा जी  सकट चौथ का महत्व 24 जनवरी 2019 सकट चौथ पूरे साल में पड़ने वाली 4 बड़ी चतुर्थी तिथियों में से एक है। सकट चौथ पर सुहागन स्त्रियां सुबह-शाम गणेशजी की पूजा करती है और रात में चंद्रमा के दर्शन और पूजा करने के बाद पति का आशीर्वाद लेती हैं। इसके बाद व्रत खोला जाता है। इस तरह व्रत करने से दाम्पत्य जीवन में कभी संकट नहीं आता। पति की उम्र बढ़ती है और शादीशुदा जीवन में प्रेम के साथ सुख भी बना रहता है। इस व्रत को करने से पति के सारे संकट भी दूर हो जाते हैं। सकट चौथ की कथा सतयुग में राजा हरिश्चंद्र के राज्य में एक कुम्हार था। एक बार तमाम कोशिशों के बावजूद जब उसके बर्तन कच्चे रह जा रहे थे तो उसने यह बात एक पुजारी को बताई। उस पर पुजारी ने बताया कि किसी छोटे बच्चे की बलि से ही यह समस्या दूर हो जाएगी। इसके बाद उस कुम्हार ने एक बच्चे को पकड़कर भट्टी में डाल दिया। वह सकट चौथ का दिन था। काफी खोजने के बाद भी जब उसकी मां को उसका बेटा नहीं मिला तो उसने गणेश जी के समक्ष सच्चे मन से प्रार्थना की। उधर जब कुम्हार ने सुबह उठकर देखा तो भट्टी में उसके बर्तन तो पक गए लेकिन बच्चा...
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*स्वास्तिक की महिमा -*  *स्वास्तिक - अर्थ - महत्त्व -  रहस्य -  लाभ उठाने के तरीके? -* स्वस्तिक अत्यन्त प्राचीन काल से भारतीय संस्कृति में मंगल-प्रतीक माना जाता रहा है। इसीलिए किसी भी शुभ कार्य को करने से पहले स्वस्तिक चिह्व अंकित करके उसका पूजन किया जाता है। आज हम इसका अर्थ, महत्व और उपयोग के बारे में कुछ दुर्लभ जानकारियां देंगे. अर्थ : स्वस्तिक शब्द सु+अस+क से बना है। 'सु' का अर्थ अच्छा, 'अस' का अर्थ 'सत्ता' या 'अस्तित्व' और 'क' का अर्थ 'कर्त्ता' या करने वाले से है। इस प्रकार 'स्वस्तिक' शब्द का अर्थ हुआ 'अच्छा' या 'मंगल' करने वाला। 'अमरकोश' में भी 'स्वस्तिक' का अर्थ आशीर्वाद, मंगल या पुण्यकार्य करना लिखा है। अमरकोश के शब्द हैं - 'स्वस्तिक, सर्वतोऋद्ध' अर्थात् 'सभी दिशाओं में सबका कल्याण हो।' इस प्रकार 'स्वस्तिक' शब्द में किसी व्यक्ति या जाति विशेष का नहीं, अपितु सम्पूर्ण विश्व के कल्याण या 'वसुधैव कुटुम्बकम्' की भावना निहित है। 'स्वस्तिक' शब्द की...
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🌷 *भैरव अष्टमी - 29 नवंबर दिन गुरुवार* 🌷 🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹 धर्म ग्रंथों के अनुसार मार्गशीर्ष मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को कालभैरव अष्टमी का पर्व मनाया जाता है। मान्यता है कि इसी दिन भगवान शिव ने कालभैरव का अवतार लिया था। इसलिए इस पर्व को कालभैरव जयंती को रूप में मनाया जाता है। इस बार ये पर्व 29 नवंबर 2018, दिन गुरुवार को है । यह दिन भगवान भैरव और उनके सभी रूपों के समर्पित होता है। भगवान भैरव के मुख्य 8 रूप माने जाते हैं। उन रूपों की पूजा करने से भगवान अपने सभी भक्तों की रक्षा करते हैं और उन्हें अलग-अलग फल प्रदान करते हैं। *भगवान भैरव के 8 रूप* *1. कपाल भैरव* इस रूप में भगवान का शरीर चमकीला है, उनकी सवारी हाथी है । कपाल भैरव एक हाथ में त्रिशूल, दूसरे में तलवार तीसरे में शस्त्र और चौथे में पात्र पकड़े हैं। भैरव के इन रुप की पूजा अर्चना करने से कानूनी कारवाइयां बंद हो जाती है । अटके हुए कार्य पूरे होते हैं । *2. क्रोध भैरव* क्रोध भैरव गहरे नीले रंग के शरीर वाले हैं और उनकी तीन आंखें हैं । भगवान के इस रुप का वाहन गरुण हैं और ये दक्षिण-पश्चिम दिशा के स्वामी माने जा...
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मौली क्या है, क्यों है इसका इतना धार्मिक महत्व.......... येन बद्धो बलीराजा दानवेन्द्रो महाबल:। तेन त्वामनुबध्नामि रक्षे माचल माचल।। मौली बांधना वैदिक परंपरा का हिस्सा है। यज्ञ के दौरान इसे बांधे जाने की परंपरा तो पहले से ही रही है, लेकिन इसको संकल्प सूत्र के साथ ही रक्षा-सूत्र के रूप में तब से बांधा जाने लगा, जबसे असुरों के दानवीर राजा बलि की अमरता के लिए भगवान वामन ने उनकी कलाई पर रक्षा-सूत्र बांधा था। इसे रक्षाबंधन का भी प्रतीक माना जाता है, जबकि देवी लक्ष्मी ने राजा बलि के हाथों में अपने पति की रक्षा के लिए यह बंधन बांधा था। मौली को हर हिन्दू बांधता है। इसे मूलत: रक्षा सूत्र कहते हैं। मौली का अर्थ : 'मौली' का शाब्दिक अर्थ है 'सबसे ऊपर'। मौली का तात्पर्य सिर से भी है। मौली को कलाई में बांधने के कारण इसे कलावा भी कहते हैं। इसका वैदिक नाम उप मणिबंध भी है। मौली के भी प्रकार हैं। शंकर भगवान के सिर पर चन्द्रमा विराजमान है इसीलिए उन्हें चंद्रमौली भी कहा जाता है। मौली बांधने का मंत्र : ‘येन बद्धो बली राजा दानवेन्द्रो महाबल:। तेन त्वामनुबध्नामि रक्षे मा चल मा चल।।’...
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ये 15 तरह के दीपक आपके हर तरह के कष्टों को दूर कर देंगे दीपावली पर अकसर चारों ओर दीपक जलाए जाते हैं, हालांकि सभी घरों में दीपावली के अलावा प्रतिदिन पूजाघर में दीपक जलाए जाने का प्रचलन है। दीपक जलाना बहुत ही शुभ होता है। कहते हैं कि इसको जलाने के कई तरह के कष्ट दूर होते हैं। आओ जानते हैं दीपक के बारे में कुछ महत्वपूर्ण जानकारियां। दीपक कई प्रकार के होते हैं, जैसे चांदी के दीपक, मिट्टी के दीपक, लोहे के दीपक, ताम्बे के दीपक, पीतल की धातु से बने हुए दीपक तथा आटे से बनाए हुए दीपक। दीपावली पर मिट्टी के दीपक ही जलाने का महत्व है। मिट्टी के दीपक अधिक शुभ होते हैं। आओ जानते हैं कि कौन-सा दीप किस हेतु जलाया जाता है? 1. आटे का दीपक किसी भी प्रकार की साधना या सिद्धि हेतु आटे का दीपक बनाते हैं और इसे ही पूजा करने के लिए सबसे उत्तम मानते हैं। 2. घी का दीपक आर्थिक तंगी से मुक्ति पाने के लिए रोजाना घर के देवालय में शुद्ध घी का दीपक जलाना चाहिए। इससे देवी-देवता भी प्रसन्न होते हैं। आश्रम तथा देवालय में अखंड ज्योत जलाने के लिए भी शुद्ध गाय के घी का या तिल के तेल का उपयोग किया जाता है। ...
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शरद पूर्णिमा विशेष 〰〰🌼🌼〰〰 अक्टूबर 23को समस्त भारत वर्ष में शरद पूर्णिमा का पर्व मनाया जायेगा। इस दिन श्री कृष्ण ने गोपियों के साथ महारास रचाया था। साथ ही माना जाता है कि इस दिन मां लक्ष्मी रात के समय भ्रमण में निकलती है यह जानने के लिए कि कौन जाग रहा है और कौन सो रहा है। उसी के अनुसार मां लक्ष्मी उनके घर पर ठहरती है। इसीलिए इस दिन सभी लोग जगते है । जिससे कि मां की कृपा उनपर बरसे और उनके घर से कभी भी लक्ष्मी न जाएं। इसलिए इसे कोजागरी पूर्णिमा या रास पूर्णिमा भी कहते हैं। हिन्दू पंचांग के अनुसार आश्विन मास की पूर्णिमा ही शरद पूर्णिमा पर्व मनाया जाता है।  इस दिन पूरा चंद्रमा दिखाई देने के कारण इसे महापूर्णिमा भी कहते हैं। पूरे साल में केवल इसी दिन चन्द्रमा सोलह कलाओं से परिपूर्ण होता है। हिन्दी धर्म में इस दिन कोजागर व्रत माना गया है। इसी को कौमुदी व्रत भी कहते हैं। मान्यता है इस रात्रि को चन्द्रमा की किरणों से अमृत झड़ता है। तभी इस दिन उत्तर भारत में खीर बनाकर रात भर चाँदनी में रखने का विधान है। शरद पूर्णिमा विधान 〰〰〰〰〰〰 इस दिन मनुष्य विधिपूर्वक स्नान करके उपवास रखे औ...
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*नवरात्र में कन्या पूजन* 🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹 नवरात्र में कन्‍या को देवी का रूप मानकर पूजन किया जाता है। कन्याओं का देवियों की तरह आदर सत्कार और भोज कराने से मां दुर्गा प्रसन्न होती हैं और अपने भक्तों को मनोवांछित फल प्रदान करती है। *कन्या पूजन में कन्याओं की उम्र* कन्या पूजन में कन्या की आयु 2 वर्ष से ऊपर तथा 11 वर्ष से कम होनी चाहिए। श्रीमद देवीभागवत पुराण के अनुसार कन्या पूजन में 1 वर्ष की कन्या को नही बुलाना चाहिए, क्योकि वह कन्या गंध भोग आदि पदार्थो के स्वाद से एकदम अनभिज्ञ तथा अपनी भावना को भी व्यक्त नहीं कर पाती है । अतः इस उम्र की कन्या का पूजन नही करना चाहिए। पूजा में कन्या की संख्या कम से कम 9  होनी चाहिए। कन्या पूजन के समय एक बालक भी होना चाहिए जिसे हनुमानजी अथवा भैरव का रूप माना जाता है। जिस प्रकार माता की पूजा भैरव के बिना पूर्ण नहीं होती है, उसी प्रकार कन्या-पूजन के समय एक बालक को भी भोजन कराना बहुत जरूरी होता है। *उम्र के अनुसार कन्या का नामकरण* प्रथम वर्ष –      देवी रूप में द्वितीय वर्ष –    कुमारी तृतीय वर्ष –  ...
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दुर्गा सप्तशती के दुर्लभ प्रयोग जय माता विंध्यवासिनी मां दुर्गा शप्तशती आज के कलयुग में एक बहुत ही प्रभावी और तीव्र प्रभाव देने वाला चरित्र है इसको यदि समुचित तरीके से प्रयोग किया जाये तो एक व्यक्ति को उसके सभी प्रश्नों और समस्यायों का निवारण इसके श्लोकों में निहित है -! मेरा अपना मानना तो ये हैं की इस पुस्तक कि जरुरत हर एक घर में है और साथ ही इसके विधानों कि जानकारी भी प्रत्येक मनुष्य के लिए आवश्यक है -! लेकिन विधि का विधान भी बहुत बड़ा है – मैंने स्पष्ट देखा है कि यदि आपके भाग्य में कष्ट लिखा हुआ है तो सामने आपका समाधान लिए हुए कोई व्यक्ति खड़ा है और बार – बार दोहरा रहा है कि ऐसे कर लो तो समस्यायों से मुक्त हो जाओगे लेकिन आपके पास समय ही नहीं होता कि आप किसी कि बात सुन सकें या किसी विधान को कर सकें -! आज का समाज इतना भौतिक हो गया है कि सभी खुश रहना चाहते हैं लेकिन खुद को खुश रखने के लिए जब प्रयास करने कि बारी आती है तो प्रतिनिधि तलाश करने लग जाते हैं जो उनके बदले कुछ ले देकर जो भी करना है कर दे और जिसका फल उन्हें तत्काल मिल जाये । लेकिन कोई भी ये नहीं सोचता कि ऐसा कैस...
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कलश स्थापना विधि इस साल शारदीय नवरात्र 10 अक्टूबर 2018 से शुरू हो रहे हैं। हिंदू धर्म में नवरात्रि को बहुत ही शुभ और पवित्र माना जाता है। मान्यता है कि नवरात्रि के नौ दिन मां दुर्गा अलग-अलग रूप में आपके घर में विराजमान रहती हैं।  नवरात्रि के प्रत्येक दिन मां भगवती के एक स्वरूप श्री शैलपुत्री, श्री ब्रह्मचारिणी, श्री चंद्रघंटा, श्री कूष्मांडा, श्री स्कंदमाता, श्री कात्यायनी, श्री कालरात्रि, श्री महागौरी, श्री सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है। यह क्रम प्रतिपदा को प्रात: काल शुरू होता है। प्रतिदिन जल्दी स्नान करके मां भगवती का ध्यान तथा पूजन करना चाहिए। सर्वप्रथम कलश स्थापना की जाती है घट स्थापना शुभ मुहूर्त (10 अक्टूबर 2018, प्रात: 6:21 से 7:25 के बीच) शारदीय नवरात्रा घट स्थापना मूहूर्त योग  घट स्थापना देवी का आहवान के लिये देवी पुराण व तिथि तत्व में प्रातकाल प्रतिपदा तिथि एवं द्विस्वभाव लग्र में घट स्थापना करना श्रेष्ठ बताया है। जिसमें चित्रा नक्षत्र एवं वैधृति योग को त्याग्य बताया गया है। जिसमें चित्रा नक्षत्र एवं वैधृति योग का पूर्वाद्र्ध दो चरण त्याग कर घट स्थाप...
 यह पोस्ट कृपया अवश्य पढ़ें। : एक पंडितजी को नदी में तर्पण करते देख एक फकीर अपनी बाल्टी से पानी  जाप करने लगे , " मेरी प्यासी गाय को पानी मिले।" पंडितजी के पुछने पर बोले जब आपके चढाये जल भोग आपके पुरखों को मिल जाते हैं तो मेरी गाय को भी मिल जाएगा। पंडितजी बहुत लज्जित हुए।" कहानी सुनाकर इंजीनियर साहब जोर से ठठाकर हँसने लगे। बोले - " सब पाखण्ड है शर्मा जी। " न मैं बहुत पुजा पाठ करने वाला हूँ न हिं इंजीनियर साहब कोई विधर्मी ; पर शायद मैं कुछ ज्यादा हिं सहिष्णु हूँ इसलिए लोग मुझसे ऐसे कुतर्क करने से पहले ज्यादा सोचते नहीं। खैर मैने कुछ कहा नहीं बस सामने मेज पर से 'कैलकुलेटर' उठाकर एक नंबर डायल किया और कान से लगा लिया। बात न हो सकी तो इंजीनियर साहब से शिकायत की। वो भड़क गए । बोले- " ये क्या मज़ाक है?? 'कैलकुलेटर ' में मोबाइल का फंक्शन कैसे काम करेगा। " तब मैंने कहा , ठीक वैसे हिं स्थूल शरीर छोड़ चुके लोगों के लिए बनी व्यवस्था जीवित प्राणियों पर कैसे काम करेगी। साहब झेंप मिटाते हुए कहने लगे- " ये सब पाखण्ड है , अगर सच है तो सिद...
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भगवान विष्णु के “अनंत” रूप की पूजा का महत्व! 23 सितंबर 2018 को मनाया जाएगा अनंत चतुर्दशी का पर्व, जानें इस व्रत की पूजा विधि।  अनंत चतुर्दशी जिसे अनंत चौदस के नाम से भी जाना जाता है, यह हिन्दू धर्म में मनाया जाने वाला एक पर्व है। भाद्रपद मास में शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी को अनंत चतुदर्श मनाई जाती है। इस वर्ष यह पर्व 23 सितंबर रविवार को मनाया जाएगा। इस दिन भगवान विष्णु के अनंत रूप की पूजा होती है। गणेश चतुर्थी के दिन स्थापित की गईं गणेश प्रतिमाओं का विसर्जन भी 10 दिन बाद अनंत चतुर्दशी के दिन किया जाता है। हालांकि गणेश स्थापना 3, 5 और 7 दिन के लिए भी की जाती है। उत्तर और मध्य भारत में अनंत चतुर्दशी का पर्व बड़े धूमधाम से मनाया जाता है। अनंत चतुर्दशी पूजा मुहूर्त 2018पूजा का समय06:09:42 से 7:19:37 24 सितंबर तकअवधि25 घंटे 9 मिनट    अनंत चतुर्दशी का महत्व हिन्दू धर्म में व्रत, पर्व और त्यौहार का विशेष महत्व है। हर साल कई व्रत और त्यौहार मनाये जाते हैं। इन्हीं में से एक है अनंत चतुर्दशी का पर्व। अनंत चतुर्दशी पर भगवान विष्णु के अनंत रूप की पूजा की जाती है। यह पूजन दोपहर ...
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*★ पितृ पक्ष - श्राद्ध-  24 सितम्बर 2018* •• जिन लोगों को अपने परिजनों की मृत्यु की तिथि ज्ञात नहीं होती उनके लिये भी श्राद्ध-पक्ष में कुछ विशेष तिथियाँ निर्धारित की गई हैं । उन तिथियों पर वे लोग पितरों के निमित श्राद्ध कर सकते है । 1. प्रतिपदा : इस तिथि को नाना-नानी के श्राद्ध के लिए सही बताया गया है । इस तिथि को श्राद्ध करने से उनकी आत्मा को शांति मिलती है । यदि नाना-नानी के परिवार में कोई श्राद्ध करने वाला न हो और उनकी मृत्युतिथि याद न हो, तो आप इस दिन उनका श्राद्ध कर सकते हैं । 2. पंचमी : जिन लोगों की मृत्यु अविवाहित स्थिति में हुई हो, उनका श्राद्ध इस तिथि को किया जाना चाहिये । 3. नवमी : सौभाग्यवती यानि पति के रहते ही जिनकी मृत्यु हो गई हो, उन स्त्रियों का श्राद्ध नवमी को किया जाता है । यह तिथि माता के श्राद्ध के लिए भी उत्तम मानी गई है । इसलिए इसे मातृ-नवमी भी कहते हैं । मान्यता है कि - इस तिथि पर श्राद्ध कर्म करने से कुल की सभी दिवंगत महिलाओं का श्राद्ध हो जाता है । 4. एकादशी और द्वादशी : एकादशी में वैष्णव संन्यासी का श्राद्ध करते हैं । अर्थात् इस तिथि ...
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*सम्पूर्ण दरिद्रता निवारण हेतु महालक्ष्मी ब्रत 17 सितम्बर 2018 से शुरू हो रहा है- ज्योतिष उपाय ग्रुप में सर्वप्रथम जानिए -व्रत कथा  पूजा विधि -और उद्यापन की सम्पूर्ण विधि-* 16 दिनों तक चलने वाला महालक्ष्मी व्रत कल भाद्रपद के शुक्लपक्ष की अष्टमी से प्रारम्भ होकर आश्विन कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि तक चलता है। मान्यता है कि ये व्रत 16 दिन तक किया जाता है। अगर आप पूरे सोलह दिनों तक इस व्रत को करने में असमर्थ हैं, वो सोलह दिनों में से केवल 3 दिन के लिये यह व्रत कर सकते हैं। लेकिन ये तीन व्रत पहले, मध्य और आखिर में किये जाते हैं। इस व्रत में अन्न ग्रहण नहीं किया जाता और 16वें दिन पूजा कर इस व्रत का उद्यापन किया जाता है। शास्त्रानुसार यह बहुत महत्वपूर्ण व्रत है। इस व्रत को रखने से मां लक्ष्मी सभी मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं और जीवन में हर प्रकार की समस्याओं का अंत होता है। *महालक्ष्मी व्रत पूजा विधि –*  पूजन के लिए सबसे पहले कलश की स्थापना की जाती है। राहुकाल को छोड़कर आप किसी भी शुभ मुहूर्त में कलश स्थापना कर सकते हैं। कलश स्थापना के बाद कलश पर एक कच्चा नारियल लाल कपड़े में ल...